Hindi Rhymes / Poems

आलू कचालू बेटा कहाँ गए थे

आलू कचालू बेटा कहाँ गए थे,
बैंगन की टोकरी में सो रहे थे,
बैंगन ने लात मारी रो रहे थे,
मम्मी ने प्यार किया हंस रहे थे,
पापा ने पैसे दिए नाच रहे थे।


आलू कचालू बेटा एक हिंदी भाषा की लोकप्रिय कविता है. यह कविता एक छोटे से बच्चे के बारे में है जो अपने माता-पिता से दूर चला जाता है और एक बगीचे में खो जाता है. बच्चे को अंततः उसके माता-पिता द्वारा पा लिया जाता है और वे उसे घर ले आते हैं. कविता में प्रयुक्त शब्दों का इस्तेमाल बहुत ही सरल और सुंदर है, और यह कविता बच्चों को बहुत पसंद आती है.

चुन्नू, मुन्नू थे दो भाई

चुन्नू, मुन्नू थे दो भाई,
रसगुल्ले पर हुई लड़ाई ।
चुन्नू बोला मै खाऊंगा,
मुन्नू बोला मै खाऊंगा ।
हल्ला सुनकर मम्मी आई,
दोनों को एक चपत लगाई
आधा तू ले चुन्नू बेटा,
आधा तू ले मुन्नू बेटा,
ऐसा झगडा कभी न करना
आपस में तुम मिलकर रहना ।

चंदा मामा दूर के

चंदा मामा दूर के, पुए पकाए बूर के
चंदा मामा दूर के, पुए पकाए बूर के
आप खाए थाली मे, मुन्ने को दे प्याली मे
आप खाए थाली मे, मुन्ने को दे प्याली मे
चंदा मामा दूर के, पुए पकाए बूर के
प्याली गयी टूट, मुन्ना गया रूठ
प्याली गयी टूट, मुन्ना गया रूठ
लाएँगे नयी प्यालिया, बजा-बजा के तालिया
लाएँगे नयी प्यालिया, बजा-बजा के तालिया
मुन्ने को मनाएँगे हम दूध मलाई खाएँगे
चंदा मामा दूर के, पुए पकाए बूर के
आप खाए थाली मे, मुन्ने को दे प्याली मे
चंदा मामा दूर के, पुए पकाए बूर के
उड़नखटोले बैठ के मुन्ना चंदा के घर जाएगा
उड़नखटोले बैठ के मुन्ना चंदा के घर जाएगा
तारो के संग आँख मिचौली खेल के दिल बहलाएगा
खेल कूद से जब मेरे मुन्ने का दिल भर जाएगा
ठुमक-ठुमक मेरा मुन्ना वापस घर को आएगा
चंदा मामा दूर के, पुए पकाए बूर के
हो चंदा मामा दूर के, पुए पकाए बूर के
आप खाए थाली मे, मुन्ने को दे प्याली मे
आप खाए थाली मे, मुन्ने को दे प्याली मे
चंदा मामा दूर के, हो पुए पकाए बूर के

“चंदा मामा दूर के” एक मज़ेदार बच्चों के गीत है जो बच्चों को मनोरंजन और मुस्कान से भर देता है। इस गीत में चंदा मामा और मुन्ने के बीच एक प्यारी सी बातचीत दिखाई गई है। गीत में बताया गया है कि चंदा मामा दूर रहते हैं और प्याली में पुए पकाते हैं, और मुन्ने को उस प्याली में दे देते हैं। मुन्ने खुश होकर बजाज़ तालियाँ बजाता है, जब उसकी प्याली टूट जाती है, तो चंदा मामा उसे नई प्याली खरीदकर देते हैं। गीत के माध्यम से बच्चों को नए शब्दों का परिचय भी होता है, जो उनकी भाषा और शब्दावली के विकास में मदद करता है। इस गीत से बच्चों को यह सिखाया जाता है कि हमें आपसी समझदारी से समस्याओं का सामना करना चाहिए और सम्मति के साथ मिलकर उन्हें हल करना चाहिए।

बन्दर मामा पहन पजामा

बन्दर मामा पहन पजामा
दावत खाने आये।
ढीला कुरता , टोपी, जूता
पहन बहुत इतराए।
रसगुल्ले पर जी ललचाया,
मुँह में रखा गप से।
नरम नरम था, गरम गरम था,
जीभ जल गई लप से।
बन्दर मामा रोते रोते
वापस घर को आए।
फेंकी टोपी, फेंका जूता,
रोए और पछताए।

“बन्दर मामा पहन पजामा” एक मजेदार और शिक्षाप्रद कविता है जो बच्चों को खिलौनों और खाने के महत्व को समझाती है। इस कविता में बन्दर मामा पहन पजामा में एक दावत में जाने के लिए तैयार होकर जाते हैं। वे खाने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं और रसगुल्ले की इच्छा भी करते हैं, लेकिन अपने उत्साह में वे जीभ जला देते हैं। जब वे रोते हुए घर वापस आते हैं, तो उन्होंने अपने टोपी और जूते फेंक दिए और खाने की बजाय खिलौनों को प्राथमिकता दी। इस कविता के माध्यम से बच्चों को सिखाया जाता है कि खिलौने का खास महत्व है और उन्हें समझने की जरूरत है, साथ ही अपने उत्साह को संयमित रखने की भी आवश्यकता है। यह कविता बच्चों को नैतिक मूल्यों के साथ-साथ खाने के महत्व को भी समझाती है।

छुक छुक करती रेलगाड़ी आयी

छुक छुक करती रेलगाड़ी आयी,
पो पो पी पी सीटी बजाती आयी,
इंजन है इसका भारी-भरकम।
पास से गुजरती तो पूरा स्टेशन हिलाती,
धमधम धमधम धमधम धमधम,
पहले धीरे धीरे लोहे की पटरी पर चलती।
फिर तेज गति पकड़ कर छूमंतर हो जाती,
लाल बत्ती पर रुक जाती,
हरी बत्ती होने पर चल पड़ती।
देखो देखो छुक छुक करती रेलगाड़ी,
काला कोट पहन टीटी इठलाता,
सबकी टिकट देखता फिरता।
भाग भाग कर सब रेल पर चढ जाते,
कोई छूट न पाए इसलिए,
रेलगाड़ी तीन बार सीटी बजाती।
छुक छुक करती रेलगाड़ी आयी।

“छुक छुक करती रेलगाड़ी” एक मजेदार बच्चों की कविता है जो रेलगाड़ी के सफर को रंगीन तरीके से वर्णन करती है। इस कविता में एक रेलगाड़ी आती है जो छुक छुक की आवाज़ के साथ आती है। रेलगाड़ी की चारों ओर सीटी बजती है और इंजन इसका भारी-भरकम होता है। रेलगाड़ी धीरे-धीरे लोहे की पटरी पर चलती है और फिर तेज गति पकड़ कर चलती है। रेलगाड़ी के टिकट देखने के लिए यात्री भाग-भाग कर उस पर चढ़ जाते हैं। रेलगाड़ी की बारहवीं सीटी पर वह रुक जाती है, जिसके बाद फिर से तीन बार सीटी बजती है।

इस कविता के माध्यम से बच्चों को रेलगाड़ी के सफर का मजा और रंगीन तरीके से अनुभव कराया जाता है। यह बच्चों को गाड़ी के चलने और सीटी बजने के साथ-साथ उसके भीतर होने वाली गतिविधियों के बारे में भी सिखाती है। इससे बच्चों की कल्पना को विकसित करने में भी मदद मिलती है और उन्हें सामाजिकता और जिम्मेदारी के मूल्यों को समझने में भी सहायता प्रदान करती है।

मछ्ली जल की रानी है

मछ्ली जल की रानी है
जीवन उसका पानी है
हाथ लगाओ तो डर जाएगी
बाहर निकालो तो मर जाएगी
पानी मे डालो तो तैर जाएगी
पानी मे डालो तो तैर जाएगी

यह बच्चों के लिए प्रसिद्ध हिंदी नृत्य गीत है जिसमें एक मछली के रूप में विवरण दिया गया है कि जीवन उसके लिए पानी जीवनमय है। लेकिन हाथ लगाने और उसे बाहर निकालने पर उसका अस्तित्व खतरे में हो जाता है, जबकि पानी में डालने से वह तैरती है और जीवित रहती है। यह गीत बच्चों को पानी के महत्व को समझाने के लिए सिखाता है।

चिड़िया रानी, चिड़िया रानी

चिड़िया रानी, चिड़िया रानी
तुम हो पेड़ों की रानी

सबह सवेरे उठ जाती हो
ना जाने क्या गाती हो

क्या तुम भी पढ़ने जाती हो
या नौकारी करने जाती हो

शाम से पहले आती हो
बच्चों का दाना लाती हो

भर-भर चोंच खिलाती दाना
चूं – चूं चहक सुनाती गाना

यह एक प्यारी सी कविता है जो चिड़ियों के सुंदर स्वभाव और उनके दैनिक क्रियाकलापों को वर्णन करती है। चिड़िया रानी पेड़ों की रानी होती है और सवेरे सबह उठकर अपनी छोटे-छोटे बच्चों को खाने के लिए दाना खिलाती है। वह अपने मीठे गाने से सभी को प्रसन्न करती है। यह कविता बच्चों को जीवन के रंग-बिरंगे पलों का आनंद लेने को प्रेरित करती है।

जंगल के राजा की आज है सगाई

जंगल के राजा की आज है सगाई,
सबको बांटी खूब मिठाई।

कब से था जिसका इंतजार,
आज सब देंगे राजा को बधाई।

फोटो लेंगे सपनों के राजा,
हाथी बजाएगा बैंड और बाजा।

गलती से तुम भूल ना जाना,
भालू परोसेगा सबको खाना।

बंदर सब होंगे दरबारी,
लोमड़ी पहन के आएगी साड़ी।

कोयल जब शुरू करेगी गाना,
तब जमेगी महफ़िल सारी।

सज धज के हम भी जाएंगे,
तोहफ़ा भी दे कर आएंगे।

नाच-गाना खाना और पीना,
खूब धमाल मचाएंगे।

अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो

अक्कड़ बक्कड़ बंबे बो,

अस्सी नब्बे पूरे सौ

सौ में लगा धागा

चोर निकलके भागा

रानी की बेटी सोती थी

मोती की माला बोती थी

मोती बड़े सचे

जैसे प्यारे बच्चे

यह गीत बच्चों के बीच में मनोरंजन के लिए पसंद किया जाता है और इसे बच्चों को शब्द संज्ञा और मुहावरे के साथ मिलाकर सिखाने के उद्देश्य से उपयोग किया जाता है।

आज इतवार है

आज इतवार है,

तोते को बुखार है

तोता गया डॉक्टर के पास

डॉ ने लगाई सुई

तोता बोला उई उई उई

आज सोमवार है,

हाथी को बुखार है

हाथी गया डॉक्टर के पास

डॉ ने लगाई सुई

हाथी बोला उई उई उई

आज मंगलवार है,

चूहे को बुखार है

चूहा गया डॉक्टर के पास

डॉ ने लगाई सुई

चूहा बोला उई उई उई

आज बुधवार है,

बंदर को बुखार है

बंदर गया डॉक्टर के पास

डॉ ने लगाई सुई

बन्दर बोला उई उई उई

आज गुरुवर है,

घोड़े को बुखार है

घोड़ा गया डॉक्टर के पास

डॉ ने लगाई सुई

घोड़ा बोला उई उई उई

आज शुक्रवार है,

शेर को बुखार है

शेर गया डॉक्टर के पास

डॉ ने लगाई सुई

शेर बोला उई उई उई

आज शनिवार है,

बिल्ली को बुखार है

बिल्ली गई डॉक्टर के पास

डॉ ने लगाई सुई बिल्ली बोली उई उई उई

यह मजेदार और रंगीन कहानी है जिसमें विभिन्न जानवरों को उनके बुखार के समय डॉक्टर के पास जाने का वर्णन किया गया है। इस गीत के माध्यम से बच्चों को दिनों के नाम सीखने और जानवरों के नाम अनुसरण करने का अभ्यास कराया जा सकता है। यह गीत बच्चों के बीच में शिक्षा और मनोरंजन का एक अच्छा माध्यम है।

पंख फेला कर

पंख फेला कर, छड़ी चमका कर,
आई हूं मैं बहुत दूर से उड़ कर।
जादू सी है दुनिया मेरी,
लेकर आई हूं खुशियों की झोली।
सब में प्यार फैलाती हूँ,
कभी हसती हूं कभी गाती हूं। चाहे उठे हैं फूल और बगिये,
और पंछी, झरने और जीव।
तुम भी आओ मेरे साथ,
फैलाओ ये प्यारी सी बात.
हँसो और हँसाओ सब को,
ऐसी दुनिया बनाते जाओ
जग मग जग मग करते सब,
और मिल बांटके रहते सब

इस कविता के माध्यम से एक खुशनुमा संदेश दिया जाता है जो हमें सभी के साथ मिलकर खुशियां बाँटने की अहमियत को समझाता है। यह कविता बच्चों को प्रेरित करने और खुशनुमा वातावरण बनाने के लिए एक बहुत अच्छा उदाहरण है। इसके माध्यम से बच्चे सीखते हैं कि खुशियों को बाँटना और अच्छे समय में दोस्तों के साथ हंसना और गाना कितना महत्वपूर्ण है।

पोशम्पा भाई पोशम्पा

पोशम्पा भाई पोशम्पा
डाकुओं ने क्या किया ?
100 रूपए की घडी चुराई
अब तो जेल में जाना पड़ेगा
जेल का खाना खाना पड़ेगा
जेल का पानी पीना पड़ेगा
अब तो जेल में जाना पड़ेगा

यह गीत एक मनोरंजक तरीके से बच्चों को अपराधों के परिणाम और उनके नियंत्रण में रहने के महत्व को समझाने के लिए बनाया गया है।

आहा टमाटर

आहा टमाटर बड़ा मज़ेदार

एक दिन इसको चूहे ने खाया

बिल्ली को भी मार गिराया

आहा टमाटर बड़ा मज़ेदार

एक दिन इसको चींटी ने खाया

हाथी को भी मार गिराया

आहा टमाटर बड़ा मज़ेदार

एक दिन इसको पतलू ने खाया

मोटू को भी मार गिराया

आहा टमाटर बड़ा मज़ेदार

इस गीत के माध्यम से बच्चों को खेल का आनंद और विविधता को समझाने का प्रयास किया गया है। बच्चे इस गीत को खेलते और गाते हुए मजे करते हैं, और इससे उन्हें कहानी की रूपरेखा बनाने का अभ्यास होता है।

आम छुरी छप्पन छुरी

आम छुरी छप्पन छुरी, काला चावल काली दाल।

हमने तोड़े दस पत्ते, एक पत्ता कच्चा, हिरन का बच्चा।

बच्चा गया पानी में, पकड़ा उसकी नानी ने।

नानी गई लंदन, हम भी गए लंदन।

लंदन में मिली किताब, किताब बड़ी अच्छी।

हमने खायी मच्छी, मच्छी में था कांटा।

कांटा चुभा जोर से, हमने खाए दोसे।

दोसे बड़े अच्छे, चाचा जी नमस्ते।

इस कविता में बच्चे खेलते और रसीद के ढंग से खाने-पीने का वर्णन करते हैं। इससे उन्हें खुशियों और मनोरंजन का आनंद मिलता है और वे नए शब्द और कवितायें सीखते हैं।

ऊपर पंखा चलता है

ऊपर पंखा चलता है,

नीचे मुन्ना सोता है,

सोते सोते भूख लगी

खाले बेटा मूंगफली

मूंगफली में दाना नहीं

हम तुम्हारे मामा नहीं

मामा गए दिल्ली

वहा से लाये दो बिल्ली

बिल्ली ने मारा पंजा

मामा हो गया गंजा

मामा ने मारी लात

चल पड़ी बारात

बारात में दो बच्चे

मम्मी पापा अच्छे

इस गीत में बच्चों को खुशनुमा वातावरण में खेलने का अनुभव होता है और उन्हें साथ-साथ गाने का मजा मिलता है। इससे उनकी भाषा और रचनात्मकता में सुधार होता है।

आई दिवाली

आई दिवाली, आई दिवाली, आई दिवाली रे।

दीप जलाओ, ख़ुशी मनाओ, आई दिवाली रे।

नए नए तुम कपड़े पहनो, आई दिवाली रे।

रंगों से घर को सजाओ, आई दिवाली रे।

आई दिवाली, आई दिवाली, आई दिवाली रे।

दीप जलाओ, ख़ुशी मनाओ, आई दिवाली रे।

सबको बांटो खूब मिठाई, आई दिवाली रे।

हाथ जोड़ के पूजा कर लो, आई दिवाली रे।

आई दिवाली, आई दिवाली, आई दिवाली रे।

दीप जलाओ, ख़ुशी मनाओ, आई दिवाली रे।

यह एक दिवाली के अवसर पर गाने की कविता है, जिसमें उत्साहपूर्वक दिवाली का स्वागत किया गया है। गाने में लोगों को दिवाली की खुशी मनाने, घर को रंगीन बनाने, मिठाईयाँ बांटने, और पूजा करने के लिए प्रेरित किया गया है।

आलू बोला मुझको खा लो

आलू बोला मुझको खा लो

मैं तुमको मोटा कर दूंगा

पालक बोली मुझको खा लो

मैं तुम्हें ताकत दे दूंगी

गाजर भिंडी बैंगन बोले

गोभी मटर टमाटर बोले

अगर हमें भी खाओगे

जल्दी बड़े हो जाओगे

पानी

प्यास लगे तो पिये पानी

नहाने धोने में भी पानी

पौधे में हम डाले पानी

बिन पानी हम जी न पाये

फिर पानी क्यों व्यर्थ बहाये

नल में खुला न छोड़ो पानी

टप टप टप टप बहा पानी

पानी को तुम खूब बचाओ

काम पड़े तब उसे बहाओ

तारे

टिम टिम करते आसमान में
कितने सारे तारे हैं
इनको देखो तो लगता है
ये जग में सबसे न्यारे हैं

नीले नीले कुछ चमकीली
ये तो प्यारे प्यारे हैं
इनकी गिनती करूँ में कैसे
ये तो कितने सारे हैं

टिम टिम करते आसमान में
कितने सारे तारे हैं
इनको देखो तो लगता है
ये जग में सबसे न्यारे हैं

धोबी

धोबी आया,

धोबी आया,

कितने कपड़े लाया,

एक, दो, तीन

एक, दो, तीन

धोबी आया,

धोबी आया,

कितने कपड़े लाया,

चार, पांच, छे

चार, पांच, छे

धोबी आया,

धोबी आया,

कितने कपड़े लाया,

सात, आठ, नौ

सात, आठ, नौ

धोबी आया,

धोबी आया,

कितने कपड़े लाया,

दस, दस, दस भाई,

बस, बस, बस

बारिश

बारिश आई छम छम छम
लेकर छाता निकले हम
पैर फ़िसल गया गिर गए हम
ऊपर छाता नीचे हम

देखो देखो बादल आये
साथ अँधेरा कैसे लाये
बादल गरजा गर्र गर्र गर्र
मैंडक बोला टर्र टर्र टर्र

पानी बरसा छम छम छम
छाता लेकर निकले हम

पैर फ़िसल गया गिर गए हम
नीचे छाता ऊपर हम

हाथी

हाथी राजा, बहुत बड़े,
सूंड उठा कर कहाँ चले,
हाथी राजा, बहुत बड़े,
पूंछ हिला कर कहां चले,
मेरे घर भी आओ ना,
हलवा पूरी खाओ ना,
आओ बैठो कुर्सी पर
कुर्सी बोले चटर पटर, चटर पटर

गोल

मम्मी की रोटी गोल गोल

पापा के पैसे गोल गोल

दादा का चश्मा गोल गोल

दादी की बिंदिया गोल गोल

ऊपर पंखा गोल गोल

नीचे धरती गोल गोल

चंदा गोल सूरज गोल

हम भी गोल तुम भी गोल

सारी दुनिया गोल मटोल

सुबह

काला कौआ छपर बैठा
कैसे शोर मचाता है

कांव कांव करके वो तो
मेरी नींद भगाता है

इधर से मुर्गा कुकडू कुकडू कर
मुझको ये समझाता है
सुबह हो गई अब तो उठ जा
क्यो आलस तुमको आता है

घड़ी

घड़ी है करती टिक टिक टिक
गाडी करती छुक छुक छुक
घण्टी बजती ठन ठन ठन
गुड़िया नाचे छन छन छन
घोड़ा भागे टप टप टप
पानी बरसे छप छप छप
चिड़िया करती चूं चूं चूं
मुन्नी करती हुं हुं हुं

लालाजी ने केला खाया

लालाजी ने केला खाया
केला खा के मुंह पिचकाया
मुहं पिचका के कदम बढ़ाया
कदम के नीचे छिलका आया
लालाजी तो गिरे धड़ाम
मुँह से निकला हे भगवान

बोली नानी सुनो कहानी

बोली नानी सुनो कहानी

ना कोई राजा ना कोई रानी

तुमको मैं देती संदेश

कभी ना भूलो अपना देश

कड़वे बोल कभी ना बोलो

जब भी बोलो मीठा बोलो

पढने में तुम ध्यान लगाओ

कभी काम से ना जी चुराओ

जो करना है अब कर डालो

कल पर उसको कभी ना टालो

गिनती

एक दो, कभी ना रो
तीन चार रखना प्यार
पांच छे, मिल कर रख
सात आठ पढ़ ले पाठ
नौ दस जोर से हंस.

एक दो, मेहनत करो
तीन चार बनो होशियार
पाँच छे, कर लो फ़तेह
सात आठ खुशियाँ बाँट
नौ दस जोर से हंस.

प्यासा कौवा

एक कौवा प्यासा था,
दूर देश से आया था.

ढूंढ रहा था पीने को पानी
दिखा मटका तो मिटी परेशानी

जब पहूंचा मटके के पास,
अन्दर देख वो हुआ उदास.

मटके में पानी था थोडा
पर सूझ बूझ का साथ ना छोड़ा
कौवे ने डाले कंकर
पानी आया ऊपर

कौवे ने पिया पानी
ख़तम हुई कहानी

रात अंधेरी छा गई

पांच मील पर घर हमारा, रात अंधेरी छा गई

रास्ते में शेर मिलेगा तो क्या करोगे भाई?

घोड़े जल्दी चलो, जल्दी चलो, जल्दी चलो भाई

घोड़े जल्दी चलो, जल्दी चलो, जल्दी चलो भाई

चार मील पर घर हमारा, रात अँधेरी छा गई

रास्ते में भालू मिलेगा तो क्या करोगे भाई?

घोड़े जल्दी चलो, जल्दी चलो, जल्दी चलो भाई

घोड़े जल्दी चलो, जल्दी चलो, जल्दी चलो भाई

तीन मील पर घर हमारा, रात अँधेरी छा गई

रास्ते में हाथी मिलेगा तो क्या करोगे भाई?

घोड़े जल्दी चलो, जल्दी चलो, जल्दी चलो भाई

घोड़े जल्दी चलो, जल्दी चलो, जल्दी चलो भाई

दो मील पर घर हमारा, रात अँधेरी छा गई

रास्ते में बंदर मिलेगा तो क्या करोगे भाई?

घोड़े जल्दी चलो, जल्दी चलो, जल्दी चलो भाई

घोड़े जल्दी चलो, जल्दी चलो, जल्दी चलो भाई

एक मील पर घर हमारा, रात अँधेरी छा गई

रास्ते में बिल्ली मिलेगी तो क्या करोगे भाई?

घोड़े जल्दी चलो, जल्दी चलो, जल्दी चलो भाई

घोड़े जल्दी चलो, जल्दी चलो, जल्दी चलो भाई

डाकिया

देखो एक डाकिया आया, थैला एक हाथ में लाया

पहने हैं वो खाखी कपडे चिट्ठी कई हाथ में पकड़े

बाँट रहा घर घर में चिट्ठी मुझको भी दो लाकर चिट्ठी

चिठ्ठी में सन्देशा आया शादी में है हमें बुलाया
शादी में सब जायेंगे हम खूब मिठाई खाएंगे हम

चंदा मामा

चंदा मामा गोल मटोल
कुछ तो बोल कुछ तो बोल
कल थे आधे आज हैं गोल
खोल भी दो अब अपनी पोल

रात होते ही तुम आ जाते
अपने संग सितारे लाते
और दिन मैं कहाँ चुप जाते
कुछ तो बोल कुछ तो बोल

नाव चली

हईया ओ हईया, हईया ओ हईया,

पानी में चलती है छोटी सी नैया

नाव चली नाव चली नाव चली नाव

आगे को चली रे, पीछे को चली रे

ऊपर को चली रे, नीचे को चली रे

हईया ओ हईया, हईया ओ हईया,

पानी में चलती है छोटी सी नैया

नाव चली नाव चली नाव चली नाव

इधर को चली रे, उधर को चली रे

दायें को चली रे, बायें को चली रे

हईया ओ हईया, हईया ओ हईया,

पानी में चलती है छोटी सी नैया

नाव चली नाव चली नाव चली नाव

मेरी गुड़िया

मेरी गुड़िया, मेरी गुड़िया

हंसी खुशी की है ये पुड़िया

मैं उसको कपडे पहनाती

उसको अपने साथ सुलाती

ये है मेरी सखी सहेली

नहीं छोड़ती मुझे अकेली

ना ये ज्यादा बात बनाये

मेरी बात सुनती जाये

गाना उसको रोज सुनाती

लेकिन खाना नहीं ये खाती

मेरी गुड़िया, मेरी गुड़िया

हंसी खुशी की है ये पुड़िया

बिल्ली मौसी

बिल्ली मौसी बड़ी सयानी

सारे घर की प्यारी रानी

बड़े मजे से दूध पी जाती

चूहो को है नाच नचाती

बिल्ली मौसी बड़ी सयानी

सारे घर की प्यारी रानी

ठाट बाठ से है इतराती

रखति घर की सब निगरानी

परी

बिस्तर पर मैं सोयी थी

सपनों में खोयी थी

एक परी उड़कर आई

मुझे देखकर मुस्काई

तरह तरह के दिए उपहार

चली गई वे पंख पसार

कोयल रानी

कोयल रानी कोयल रानी

काली काली बड़ी सयानी

किस झरने का पीती पानी

हो गई जिसकी मीठी बानी

कोयल रानी कोयल रानी